8th junior state Archery championship-2019-20
UP ARCHERY ASSOCIATION

भारतीय इतिहास में धनुर्विद्या का प्रचलन रामायण व महाभारत के समय चरमोत्कर्ष पर माना जाता है। जिसमें ऐसे धनुष और बाणों का परिष्कार हो चुका था कि जिनके द्वारा पूरी सेना का एक ही बाण से संहार किया जा सकता था। इस प्रकार के यौद्धा इसी पावन भारत भूमि पर जन्में हैं। लेकिन काल के प्रहार के साथ-साथ विभिन्न विद्यायें भी प्रायः लुप्त होती चली गई और इतिहास बन गई। धुनर्विद्या भी एक विद्या के रूप में थी लेकिन वर्तमान परिप्रेक्ष्य में तीरंदाजी एक खेल की विद्या बन कर रह गई है।

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